4.29.2008

...फिर भी मैं बार-बार लिखूंगा

जो भी जितनी बार लिखूंगा
तुमको ही हर बार लिखूंगा

मन के कोरे कागज पर
नाम तेरा सरकार लिखूंगा


तुम दो उत्तर या न दो तुम
खत मैं बार-बार लिखूंगा


लाख करो तुम नफरत हमसे
नफरत को भी प्यार लिखूंगा


आएगी जब याद तुम्हारी
सूने को गुलजार लिखूंगा


आसान नहीं सच्चाई लिखना
फिर भी मैं बार-बार लिखूंगा

2 comments:

Pri said...

great work! :)

Satish Saxena said...

शाबाश ! बहुत उम्दा और एक नयेपन के साथ लिखते हो !शुभकामनायें !