9.04.2008

जिसकी सांसों में सूफी संगीत बसा है...

नाम : हंस राज हंस
जन्म : सफीपुर (जालंधर)
पिता : अरजुन सिंह
माता : अजीत कौर

जब मन बहुत उदास होता है, जब इंसान अकेला रहना चाहता हो, या उसे अकेले रहकर वो खुशी मिलती हो जो वह दुनिया की भीड़ में रह कर नहीं प्राप्त कर सकता उस वक्त संगीत ही एक ऐसा माध्यम है जिसके द्वारा वह अपने मन में उठ रहे तूफानों को शांत कर सकता है। और सूफी संगीत ही एक ऐसा जरिया है जिसके द्वारा इंसान अपने आप किसी और ही दुनिया में पाता है जहां बस वहीं है, बस वहीं। वैसे तो पंजाब में बहुत से ऐसे सूफी गायक हुए हैं... उनमें ही एक नाम है हंस राज हंस, हंस जी जब अपने सुरों के सरगम को छेड़ते हैं तो मानो लगता है सारा आकाश और सारी जमीन खाली है, हर जगह तनहाई है और एक अजीब सी खुशी जिसे शायद हर कोई महसूस नहीं कर सकता। अपने जीवन में मैने दो बार हंस जी को लाईव सुना, ये मेरे जिंदगी के यादगार पल होने के साथ-साथ मेरा ऐसा खुशनुमा समय था जब मैने सूफी संगीत को समझा और सूफी संगीत को महसूस किया।हंस जी का जन्म जालंधर के एक छोटे से गांव सफीपुर में हुआ जहां बेहद गरीबी में उन्होंने अपना बचपन बिताया। पर संगीत में उन्हें बचपन से ही रूचि थी, उनके गुरु पूरण शाहकोटी जो कि खुद सूफी गायक है ने उन्हें बचपन से ही सूफी संगीत की तालीम दी जिसके बाद आज वो सूफी संगीत की दुनिया में एक बहुत बड़ी हस्ती हैं। जोगिया दे कन्ना विच कच्च दीयां मुंदरा..., मेरे गीत लम्में ने जां भैड़ी रात लम्मी ऐ..., घगरे गोरी दे दिल मंगदे... और बहुत से ऐसे गीत जो पूरी तरह से पंजाबी सभ्याचार को दरशाते हैं उन्होंने गाए। संगीत में उनके योगदान को देखते हुए उन्हें पदम श्री से भी नवाजा गया। उनके जीवन की एक बड़ी कामयाबी यह भी रही कि उन्होंने फिल्म कच्चे धागे में संगीत के बादशाह नूसरत फतेह अली खान के साथ भी गाया है।

संगीत की दुनिया में उनका योगदान...
जोगीयां दे कन्ना विच
इक डंग होर मार जा
तेरा मेरा प्यार
आशकां दी काहदी जिंदगी
मोहब्बत
लाल घगरा
झांझर
चोरनी
तेरा इश्क
गम
सब तो सोहनी
वंजारा
यारा ओ यारा
गमां दी रात
सज्दा

2 comments:

Anonymous said...

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Anonymous said...

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