7.31.2010

तुम्हे पता नहीं मैं तुम्हे कितना चाहता हूं...


एक नवविवाहिता ने फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। क्योंकि उसका पति उस पर शक करता था। वो अपने बचपन के दोस्तों से मिलती थी। मरने से पहले उसने अपने दोस्तों को ई-मेल करके बताया कि उसकी मौत के लिए वो जिम्मेवार नहीं है। जहां तक मुझे लगता है शायद वो अपनी पत्नी से इतना प्यार करता होगा कि उसको पत्नी का किसी से मिलना या बात करना भी पसंद ना हो। प्यार की एक इंतहा तो हो सकती है पर बहुत ज्यादा भी ठीक नहीं है। शायद उसका पति कुछ ऐसा सोचा करता होगा...

तुम्हे पता नहीं मैं तुम्हे कितना चाहता हूं
हर वक्त तुम्हारे बारे में ही सोचता हूं

फिर भी तुम मुझसे दूर क्यों हो
तुम्हे पता है मैं तुम्हे कितना चाहता हूं

हर वक्त होता है ख्याल तुम्हारा
मेरी हर सांस में तुम बसती हो

तुम्हे पता नहीं मैं तुम्हे कितना चाहता हूं
नहीं पसंद किसी से मिलो तुम

डर लगता है जब दुनिया में रहती हो
डर लगता है जब तुम्हे कोई देखता है
तुम्हे पता नहीं मैं तुम्हे कितना चाहता हूं

नहीं रहना हमें इस दुनिया में
नहीं चाहिए मुझे ये दुनियादारी

मेरी हर धड़कन में तुम ही बसी हो
तुम्हे पता नहीं मैं तुम्हे कितना चाहता हूं...
तुम्हे पता नहीं मैं तुम्हे कितना चाहता हूं...।

1 comment:

Alpana Verma said...

ऐसी कथित चाहना जो दूसरे की जिंदगी को नरक बना दे,चाहना नहीं प्रताडना कहलाएगी.हर रिश्ते में एक दूसरे को सांस लेने की जगह देनी भी ज़रुरी होती है.
इसलिए जब प्यार जूनून बन जाये तो फिर प्यार नहीं रह जाता ,यहाँ उसी के चलते उस महिला ने आत्महत्या की होगी.उन दोनों को सही डॉक्टरी परामर्श की आवश्यकता थी जो नहीं मिली और एक जिंदगी तबाह हो गयी.