
अपने सपनों को पूरा करने के लिए आखिर मुझे भी घर छोड़ना ही पड़ा, क्योंकि घर में रहते हुए मैं अपने नैतिक मूल्यों से समझौता नहीं कर सकता था और मुझे लगता है कि घर रहकर मैं जिंदगी की सच्चाई को भी न जान पाऊं, इसलिए मैने घर छोड़ने का फैसला लिया, हालांकि ये मेरे लिए काफी मुशिकल भी था, पर जिंदगी की तलाश के लिए, अपने आप की तलाश के लिए, अपने अंदर छिपे एक इंसान की तलाश के लिए मुझे घर से बाहर निकलना ही पड़ा। ये तलाश क्या है, कहां से शुरु है और कहां खत्म है मुझे खुद नहीं मालूम, मैं क्या कर रहा हूं और क्या करना चाहता हूं मैं नहीं जानता, बस अपने अंदर के इंसान को ढूंढ रहा हूं, और इसलिए इधर-उधर भटक रहां हूं। ...आखिर मेरी तलाश है क्या, क्या पाना चाहता हूं मैं कभी-कभी यही सवाल मुझे बहुत उदास कर देते हैं और अभी तक इन सवालों के जवाब मुझे नहीं मिले, कई इंसान मिले जिनको देखकर ये लगा कि शायद ये मेरी कुछ मदद कर सकते हैं पर अभी तक उनसे मुखातिब होने का मौका नहीं मिला। कभी-कभी मुझे मेरे ख्याल, मेरे ज्जबात, मेरी सोच बहुत अटपटी सी लगती है क्योंकि ग्यारवी में मैडिकल की पढ़ाई छोड़ने के बाद अब मैं एक बहुत छोटी सी नौकरी कर रहां हूं। जिससे मैं बिल्कुल भी संतुष्ट नहीं हूं और शायद कभी हो भी नहीं सकता।, मुझे सबसे ज्यादा परेशानी अपनी इस आदत से होती है कि मैं रोज नई चीजे सीखना चाहता हूं और जब मैं उसे सीख लेता हूं तो वो मुझे अच्छी नहीं लगती,और अभी तक मुझे अपने अंदर एक ही विशवास दिखा कि मुझे लगता है मैं कुछ भी करता हूं, कुछ भी...
जिंदगी की असली उड़ान अभी बाकी है
मेरे इरादों का इम्तहान अभी बाकी है
अभी तो नापी है मुट्ठी भर जमीन
आगे सारा आसमान बाकी है...
5 comments:
bahut achchha blog hai ! sach padhker dil khush ho gayaa . khuda kare tumhaari qalam yoon hi chalti rahe !!!
बहुत खूब........ बस इतना ही
very nice blog
are u a poet(shayer)
imran bhai app toh bahut hi gahri paith wala banda nikla yaa.mai toh tumahre bare galat sochata tha lekin aapki soch toh bahut hi lambi hain khuda kare ki aapko bahut tarrqi nasib kare.....yaar agar kuch galat likha ho toh maaf kar dena. agar mera coment mil jaye toh mujhe ek mail jarur kar dena
bahut achhe bhai dil kya rom-rom jaag utha apki soch aur hamari dua............... apke sath hai.
ALL THE BEST
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